हमारा पर्दा गिरा है
कल तक बे पर्दा थे
कुछ परदे बागी हो चले है
वों दूसरों के आगन में सेंध लगा आये
सबने हाथ पकड़ा फिर भी एक छिटक गया
न जाने कहा से कुछ धब्बे साथ ले आया
उसे मारा-पीटा वों टस से मस ना हुआ
गरम था खून उसका
कई रंगों में रंग चूका था
फिर से पकड़कर धोया तो
सतरंगी बन चला था
वों बरदारी का ना रहा अब
चितकबरा सा लगने लगा
लोग उससे कतराने लगे
वों चीखा किसी उसकी ना सूनी
सब के आगे परदे लगे थे
कल तक वों हमारा हिस्सा था
आज अजानक पड़ोसी हो चला
एक मूक सन्नाटा सा पसरा है
Nice keep it up.
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