सोमवार, 2 मई 2011

Chini chai-Kavita



चीनी चाय पीते हुए

चाय पीते हुए
में अपने पिता के बारे में सोच रहा हूँ
आप ने कभी
चाय पीते हुए
पिता के बारे में सोचा हैं?

अच्छी बात नहीं
पिताओ के बारे में सोचना
अपनी कलई खुल जाती है

हम कुछ दुसरे हो सकते थे
पर सोच की कठिनाई यह है कि दिखा देता है
कि हम कुछ दूसरे हुए होते
अधिक उन जैसे हुए होते

कितनी दूर जाना होता है पिता से
पिता जैसा होने के लिए!

पिता भी
सवेरे चाय पीते थे
क्या वह भी
पिता के बारे में सोचते थे-
सनिकट या दूर?-------------(“अज्ञेय”)